Saturday, 7 November 2020

विजयादशमी तथा दशहरा में भेद

विजयादशमी तथा दशहरा मा भेद जान ल्यो इह बार। दस से हारे की शुभकामना रावन बनाय बार - बार।
          वे दस हैं - ज्ञानेन्द्रिय तथा कर्मेन्द्रिय 

बाजि बाजीगरी दिखा सरपर रहे सवार।
दसो बेलगाम यूँ बन रावन कर तैयार।।
दसहरा मरम समझ लै दस खींचै हर बार।
   वृत्यानुसार जो बहे दस लै बाजी मार।।
मन में नाम चाम दाम मुँह सो निकसत राम।
कइसन न रावन बनै भीतर झाँको राम।। 
कुल करम वरन पढाई ना बनिहे परमान।
आचरन सुधारे बिना रावन बन्यो जान।।
दसहरा दसहरा करत उमरिया बीत जात। 
बिजयादसमी बिसरात किस विध बनई बात।।
दस ही राम रावन बन समझ लै मूल बात।
नियमन दस करलै अभी न तो रहे पछतात।। 
मन ही राम रावन बन मन लै बाजी मार।
दसो के कारन बनै दसानन बार बार।।
जलाय सेस हो नाही रूप बदल रह जाय। 
ज्ञान विज्ञान सब कहै रावन हो बच जाय।। 
दस जब जब खावै मात मन राम होय जात।
सफल होय बिजयादसमी काहे न सुनौ बात।। 
दस सै हारे वह डरे धारत अरथ कोय। 
दसहरा कवन सुभ बनै कहत न आई लाज।। 

(शुभकामना देते वक्त अर्थ पता न होने से अमंगल होना निश्चित है।) यह विडियो सुनने का कष्ट करें :--
असुरत्व और रिवाज
https://youtu.be/PXb7PWo-eY8

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